Home तीन साल बेमिसाल मोदी सरकार में हेल्थ सेक्टर का हुआ कायाकल्प

मोदी सरकार में हेल्थ सेक्टर का हुआ कायाकल्प

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने तीन साल के कार्यकाल में अगर सबसे अधिक ध्यान किसी क्षेत्र पर दिया है, तो उसमें आम जनता का स्वास्थ्य भी शामिल है। पीएम मोदी की अगुवाई में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में बहुत ही ज्यादा काम हो रहा है। सरकार ने अनेकों नई नीतियां और कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिसका लाभ समाज के अंतिम कतार में खड़े व्यक्ति को भी मिल रहा है। मोदी सरकार का मानना है कि जिस तरह जीवित रहने के लिए भोजन आवश्यक है, उसी तरह देश के नागरिकों का सेहतमंद रहना भी जरूरी है।

स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटलीकरण
‘स्वच्छ भारत मोबाइल एप’ – स्वास्थ्य संबंधी भरोसेमंद सूचनाएं देता है। यह एप स्वस्थ जीवनशैली, बीमारियों की पूरी जानकारी, लक्षण, उपचार के विकल्प, प्राथमिक उपचार और जन स्वाथ्य चेतावनियों के बारे में बताता है। यह एंड्रोयड आधारित मोबाइल एप है जिसे 2.3 या अधिक वर्जन वाले एंड्रोयड OS में इंस्टॉल किया जा सकता है।

ई-रक्तकोष – यह इंटिग्रेटेड ब्लड बैंक मैनेजमेंट इंफोर्मेशन सिस्टम है। वेब-आधारित यह तकनीकी प्लेटफॉर्म राज्य के सभी ब्लड बैंकों को एक साथ जोड़ता है। यहां रक्तदान और उससे जुड़ी सेवाओं के खून की उपलब्धता, मान्यता, भंडारण एवं अन्य तरह के आंकड़ों की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।

इंडिया फाइट डेंगू- 2016 में जारी यह एप लोगों को डेंगू के खिलाफ अभियान और उसकी रोकथाम के तरीकों के बारे में बताता है।

किलकारी- ये ऐसा एप है जो गर्भावस्था की दूसरी तिमाही से शिशु की एक वर्ष की आयु तक, शिशु जन्म एवं शिशु की देखभाल से संबंधित उपयुक्त समय पर मुफ्त, साप्ताहिक 72 ऑडियो संदेश परिवार के मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराता है। इसे झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान के उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में शुरू किया गया है।

मोबाइल एकेडमी- आशा कार्यकर्ताओं का ज्ञान बढ़ाने, उन्हें तरोताजा करने और उनके संवाद कौशल को निखारने के मकसद से तैयार किया गया ऑडियो प्रशिक्षण पाठ्यक्रम है। यह आशा कार्यकर्ताओं को उनके मोबाइल फोन के जरिये किफायती और प्रभावी तरीके से प्रशिक्षित करता है। इससे वह बिना कहीं गए अपनी सुविधा के अनुसार सुनकर सीख सकती हैं। इसे झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड में शुरू किया गया है।

एम-सेशन- ये उन लोगों के लिए है जो तंबाकू का सेवन छोड़ना चाहते हैं। यह उन्हें मोबाइल फोन के जरिये संदेश भेजकर इस दिशा में मदद करता है। यह पारंपरिक तरीकों से कहीं ज्यादा किफायती है। दुनिया में ऐसा पहली बार है जिसमें एम-स्वास्थ्य पहल के जरिये इस तरह की दो तरफा सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल (NHP)– इसके तहत भारत के नागरिकों को स्वास्थ्य से जुड़ी सभी तरह की सूचनाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर देने की कोशिश की जा रही है।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम (ORS)-यह देशभर के विभिन्न अस्पतालों में आने वाले मरीजों को ‘आधार’ पर आधारित ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने तथा अप्वाइंटमेंट देने की व्यवस्था है।

हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफोर्मेशन सिस्टम (HMIS) के जरिये अस्पताल के ओपीडी रजिस्ट्रेशन को डिजिटलीकरण किया गया है। यह पोर्टल मरीजों को उनके ‘आधार’ नंबर में दर्ज मोबाइल नंबर के माध्यम से विभिन्न अस्पतालों के विभागों में चिकित्सकीय सलाह के लिए अप्वाइंटमेंट देता है।

एम-डाइबिटिज- इस मोबाइल नेटवर्क की ताकत और क्षमता का लाभ उठाने के मकसद से शुरू किया गया। इसमें 011-22901701 नंबर पर मिस्ड कॉल करके डाइबिटिज से जुड़ी सूचनाएं, इसके रोकथाम एवं प्रबंधन के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। ज्यादा जानकारी के लिए वेबसाइट www.mdiabetes.nhp.gov.in से भी सूचनाएं ली जा सकती हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना (NHPS)
इस नई स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को 1.0 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर दिया जाता है। 60 साल से ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों के लिए इसमें 30,000 रुपये की राशि अतिरिक्त दी जाती है।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिल कार्यक्रम
इसके अंतर्गत गरीब लोगों को मुफ्त डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्यों को सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। इसकी घोषणा 2016 के आम बजट में की गई थी। दिशा निर्देश के मुताबिक निजी साझेदार को चिकित्सकीय मानव संसाधन और डायलिसिस मशीन उपलब्ध करानी होगी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग आरओ के पानी के लिए संयंत्र, डाइलेजर और दवाइंया देगा। जबकि राज्य सरकार जिला अस्पतालों में जगह, बिजली व पानी की आपूर्ति मुहैया कराएगी।

विश्व का सबसे बड़ा दवाई सर्वेक्षण
नकली और बिना मानक गुणवत्ता वाली दवाइयों की समस्या से निपटने के लिए सर्वेक्षण का काम राष्ट्रीय बायोलॉजिकल्स संस्थान (NIB) नोएडा को सौंपा गया। NIB ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। आवश्यक दवाइयों की राष्ट्रीय सूची (NLEN)2011 के 15 विभिन्न चिकित्सीय श्रेणियों से संबंधित 224 दवाई मोलेक्यूल्स को दवाई सर्वेक्षण के सांख्यिकीय डिजाइन में शामिल किया गया है।

इस सर्वेक्षण के तहत दवा के नमूने खुदरा ब्रिकी केंद्रों, सरकारी सूत्रों और आठ हवाई अड्डों और बंदरगाहों समेत 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 654 जिलों से जमा किए गए। कुल 47,012 नमूनों में से 13 नमूने नकली पाए गए तथा 1,850 नमूने (NSQ) मानक गुणवत्ता के नहीं पाए गए। इस प्रकार भारत में बिना मानक क्वालिटी की दवाइयां 3.16 % और नकली दवाइयां 0.0245 % पाई गई। यह दवा सर्वेक्षण अभी तक का वैज्ञानिक रूप से डिजाइन किया गया सबसे बड़ा और पेशेवर सर्वेक्षण है।

प्रधानमंत्री जन औषधि योजना
आम नागरिकों को बाजार से 60 से 70 % कम कीमत पर दवाइयां मुहैया कराने के उद्देश्य से 2015 में यह योजना शुरु की गई थी। अब तक देश में 1300 से अधिक जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA)
इसका लक्ष्य सुरक्षित गर्भावस्था और सुरक्षित प्रसव के जरिये मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को एकदम कम करना है। इस के जरिए देश भर में लगभग 3 करोड़ गर्भवती महिलाओं को विशेष मुफ्त प्रसव पूर्व देखभाल मुहैया कराई जा रही है, ताकि उच्‍च जोखिम वाले गर्भधारण का पता लगाने के साथ-साथ इसकी रोकथाम की जा सके। इसके लिए गर्भवती महिलाओं को संपूर्ण एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व देखभाल और जांच के लिए हर महीने की 9 तारीख निर्धारित की गई है। यानि गर्भवती महिलाएं अब सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर अपनी दूसरी या तीसरी तिमाही में स्त्री रोग विशेषज्ञों/चिकित्सकों द्वारा मुहैया कराए जाने वाले विशेष प्रसव पूर्व चेक-अप का लाभ उठा सकती हैं।

 नए टीकाकरण कार्यक्रम

रोटा वायरस टीका- बच्चों में रोटा वायसर की वजह से होने वाली अस्वस्थता व मृत्यु को कम करने के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के मद्देनजर शुरुआती चरण में चार राज्यों हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और हरियाणा में अप्रैल 2016 से रोटा वायरस टीकाकरण को संपूर्ण टीकाकरण में शामिल किया गया।

वयस्क जेई टीकाकरण-उन जिलों में जहां वयस्क आबादी में जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई) बीमारी बड़े पैमाने पर फैलती है वहां ये टीकाकरण किया जा रहा है। असम, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के अधिक बीमारी वाले 21 जिलों को वयस्क जेई टीकाकरण के लिए चुना गया है। असम के 3 जिलों (दरांग, नौगांव व सोनितपुर) एवं पश्चिम बंगाल के 3 जिलों (दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार) के चुने गये प्रखंडों में अभियान को पूरा हो चुका है। उत्तर प्रदेश के 6 जिलों में अभियान चल रहा है।

मिशन इंद्रधनुष- इसका लक्ष्य 2020 तक उन सभी बच्चों को कवर करना है जिन्हें या तो टीका नहीं लग पाया है या डिप्थेरिया, टीबी, टेटनस, खसरा और हेपटाइटिस बी सहित रोके जा सकने वाले 11 रोगों के खिलाफ आंशिक टीका ही लगा है। समेकित बाल स्वास्थ्य एवं प्रतिरोधक सर्वेक्षण 2016 के मुताबिक मिशन इंद्रधनुष के शुरू होने के बाद से पूरी तरह से रोग प्रतिरोधक होने का दायरा 5-7 प्रतिशत बढ़ गया है। कार्यक्रम के तहत टीकाकरण कवरेज को बढ़ाने के लिए अप्रैल महीने से चौथे चरण के लिए 28 राज्यों के 254 जिलों में कार्यक्रम चल रहा है। जिन बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ है उनकी पहचान आशा और अन्य कार्यकर्ता करेंगे। वे इन 254 जिलों में घर – घर जाएंगे ताकि छूट गए बच्चों का टीकाकरण हो सके। अब तक 2.8 करोड़ बच्चों का टीकाकरण हो चुका है।

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY)
इस योजना का लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं और उसकी शिक्षा में क्षेत्रीय असमानता को मिटाकर गुणवत्ता वाले स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा का विस्तार करना है। अब तक 6 एम्स काम कर रहे हैं। रायबरेली में एम्स के निर्माण का काम जारी है। 13 अन्य स्थानों पर भी एम्स की स्थापना की घोषणा की जा चुकी है, जिसमें 5 को कैबिनेट ने मंजूरी भी दे दी है। इसके अलावा 39 गवर्नमेंट मेडिकल के DPR को मंजूरी मिल दी गई , इनमें से 38 GMC के लिए निविदाएं संबंधित कार्यकारी एजेंसियों द्वारा जारी कर दिए गये हैं। सिविल कार्य के लिए कार्यकारी एजेंसियों को परियोजना मद में लगभग 400 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं।

असम मेडिकल कॉलेज- डिब्रूगढ़, गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज- गुवाहाटी, राजकीय टीडी मेडिकल कॉलेज-अल्पुझा, केरल, गजरा राजा मेडिकल कॉलेज- ग्वालियर, श्याम शाहा मेडिकल कॉलेज- रीवा, बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज- गोरखपुर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज- जबलपुर, एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज- मेरठ, एमएलबी मेडिकल कॉलेज- झांसी और एमएलएल मेडिकल कॉलेज- इलाहाबाद में निर्णाण कार्य चल रहा है।

PMSSY के तहत चौथे चरण में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, पंजाब के बठिंडा में नए एम्स पर काम शुरु हो गया है। इसी चरण में 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज का अपग्रेडेशन कर दिया गया है।

मेडिकल शिक्षा को बड़ा प्रोत्‍साहन
शैक्षिक सत्र 2017-18 के लिए विभिन्‍न मेडिकल कॉलेजों और अस्‍पतालों में 4,000 पीजी की सीटें बढ़ा दी गई हैं। सीटों की संख्‍या की दृष्‍टि से यह अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोत्तरी है। अब देश में मेडिकल की कुल 35,117 पीजी सीटें उपलब्‍ध हैं। बजट में इसे बढ़ाकर कुल 5000 पीजी मेडिकल सीटें करने का लक्ष्‍य रखा गया है, जिसके शीघ्र ही पूरा हो जाने की संभावना है।

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET)
सुप्रीम कोर्ट ने 28 अप्रैल, 2016 और 9 मई, 2016 को संकल्प चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका पर सुनवाई के बाद NEET(UG) तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश दिया था। इसके लिए अध्यादेश लाया गया और CBSE ने 2016 में इस परीक्षा का सफलतापूर्वक आयोजन करा लिया।

AIIMS में सेंटर फॉर इंटेग्रेटिव मेडिसीन एंड रिसर्च
यहां पर भारत की प्राचीन एवं पारंपरिक चिकित्सा उपायों को समकालीन दवाओं के साथ मिश्रित करने को लेकर अनुसंधान किया जाएगा। बेहतर चिकित्सा के दृष्टिकोण से ये एक बहुत बड़ी पहल है। इसके तहत मौजूदा समय के दवा विशेषज्ञ, योग के जानकार और आयुर्वेदाचार्य एक साथ मिलकर रोगों के निदान और उसके उपचार के तरीके एवं दवाइयां ढूंढेंगे। उम्मीद है कि यह केंद्र हमारी प्राचीन परंपरागत दवाओं और उपचार के तरीकों को वैज्ञानिक आधार पर विकसित करके उसे और भी बेहतर बनाया जाएगा। इसमें योग का बहुत बड़ा योगदान होगा।

परिवार नियोजन
राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम में तीन नई विधियों को शामिल किया गया है। इंजेक्शन से लिया जाने वाला गर्भनिरोधक डीएमपीए (अंतारा) – तीन महीने में एक बार, सेंटक्रोमैन गोली (छाया) –गैर-हार्मोनयुक्त जिसे सप्ताह में एक बार लिया जाना है और प्रोजेस्टिन युक्त गोलियां (पीओपी) – स्तनपान करने वाली माताओं के लिए।

संवर्धित गर्भनिरोधक पैकेज- गर्भनिरोधक उपायों जैसे कि कंडोम, गर्भनिरोधक गोलियां व आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों की पैकेजिंग की डिजाइन में बदलाव किया गया है और उन्हें और आकर्षक बनाया गया है ताकि इन उत्पादों की मांग में वृद्धि हो।

परिवार नियोजन का नया मीडिया अभियान– परिवार नियोजन के प्रति जागरुकता के लिए 360 डिग्री की सूचना संचार के साथ नया अभियान शुरू किया गया जिसमें अमिताभ बच्चन को ब्रांड एंबेस्डर बनाया गया है।

सघन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा (IDCF)
देशभर में 11 से 23 जुलाई के बीच सघन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा मनाया जाता है, ताकि लोगों को डायरिया के दौरान की सावधानियों और उपचार के बारे में बताया जा सके। इसमें ORS बनाने की विधि भी बताई जाती है। देशभर में 5 साल से कम उम्र के करीब 10 करोड़ बच्चे हैं। 2016 के दौरान, इस कार्यक्रम तहत 6.3 करोड़ बच्चों तक ORS पहुंचा गया। 2017 के पखवाड़े के दौरान 5 साल से कम उम्र के सभी बच्चों तक पहुंचने का लक्ष्य है।

राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस (NDD)
हर साल 10 फरवरी, कृमि निवारण दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह विश्‍व का सबसे बड़ा एक दिवसीय सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान है, जिसके त‍हत 2016 में 1-19 आयु वर्ग के लगभग 30 करोड़ बच्चे और किशोरों को कृमि से मुक्ति के लिए दवाई खिलायी गई।

दीर्घ आयु (लांग्टिड्यूनल एजिंग) का अध्ययन (LASI)
ये देश में वृद्धजनों पर सबसे बड़ा अध्ययन है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की देखरेख में अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (IIPS), मुंबई ने हावर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (HSPH) और यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया (USC) के साथ मिलकर ‘द लांग्टिड्यूनल एजिंग स्टडी इन इंडिया’ चल रहा है। अभी तक भारत के पास वृद्धजनों की जनसंख्या के बारे में आंकड़ा नहीं था, ऐसे में वृद्धजनों के लिए एक नए वैज्ञानिक आंकड़ों की जरूरत थी। जिससे उनके स्वास्थ्य, आर्थिक व सामाजिक चुनौतियों का विश्लेषण किया जा सके और उसी हिसाब से उन चुनौतियों से निपटने के लिए कार्यक्रम बनाए जा सकें।

रोग नियंत्रण

तपेदिक (TB)- भारत ने 2025 तक देश से तपेदिक की बीमारी समाप्‍त करने का लक्ष्‍य रखा है और इस संबंध में तेजी से काम किया जा रहा है। इसके लिए न्यूक्लिक एसिड एम्पलीफिकेशन टेस्ट (सीबीनैट) मशीनों की संख्या बढ़ाई गई है। 2015 तक देश में 121 सीबीनैट केंद्र चल रहे थे। इन में 500 अतिरिक्त मशीनों को जोड़कर देश के सभी जिलों में कम से कम एक मशीन उपलब्ध करा दी गई है। ये मशीन माइक्रबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस का पता लगाने में तेजी से काम करता है, यह टेस्ट पूरी तरह से स्वचलित है और दो घंटे के अंदर रिपोर्ट मिल जाती है। HIV वाले TB के 92 प्रतिशत रोगियों का एंटीरैट्रोवायरल उपचार किया जा रहा है। दवा से ठीक होने वाले TB के इलाज के परिणामों में सुधार के लिए नई टीबी विरोधी दवा बेडाक्‍विलीन की पहुंच आसान बना दी गई है।

• HIC/AIDS नियंत्रण
इस बीमारी की दवा का खर्च प्रति रोगी करीब 1.18 लाख रुपये सालाना आता है। रोगियों को ये दवाऐं नि:शुल्क उपलब्ध करायी जा रही हैं। इस पहल से भारत विकसित देशों की कतार में खड़ा हो गया है।

संक्रामक बीमारियों का नियंत्रण (मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, कालाजार)
11 फरवरी, 2016 को मलेरिया उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय संरचना की शुरुआत की गई। इस रणनीति के तहत निरोधक उपयों जैसे कि मच्छर पैदा होने वाली जगहों की रोकथाम, अभियांत्रिकी उपाय, छिड़काव, मच्छरदानी, रोग का त्वरित पता लगाना और संपूर्ण उपचार शामिल है। राज्यों को वेक्टर जनित रोगों के नियंत्रण व रोकथाम के लिए तकनीकी दिशानिर्देश उपलब्ध कराए गए हैं। इसे राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम की वेबसाइट www.nvbdcp.gov.in पर भी डाला गया है। कालाजार को वर्ष 2017 तथा लम्फेटिक फिलेरिसिस को 2020 तक जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल एवं उत्तर प्रदेश के 625 प्रखंडों में से 502 में इसे पूरी तरह से खत्म भी किया जा चुका है।

गैर-संक्रामक रोग (NCD)

इस कार्यक्रम का लक्ष्य साधारण गैर-संक्रामक रोगों का शीघ्र उपचार और उसकी रोकथाम करना है। कैंसर, मधुमेह, हृदय संबंधी रोग एवं घात के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत 356 जिलों में NCD ईकाई और NCD क्लिनिक स्थापित किए गए हैं। 103 कार्डिक केयर यूनिट, 71 डे केयर सेंटर और 1871 CHC स्तर के क्लिनिक स्थापित किए जा रहै हैं। टेरीटरी केयर कैंसर सेंटर (TCCC) योजना में 20 राज्य स्तरीय कैंसर संस्थान (SCI)एवं 50 और TCCC बनाने की योजना है। यही नहीं आयुष सुविधाओं एवं योग को भी इन सेवाओं के साथ जोड़ा गया है। मधुमेह में योग के प्रभाव को जानने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया गया है।

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