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लालू के भ्रष्टाचार से ‘मुक्ति’ चाहती है बिहार कांग्रेस !

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एक तरफ भ्रष्टाचार का आरोपी लालू परिवार अपनी शराफत की ढोल पीट रहा है तो दूसरी तरफ बिहार कांग्रेस में इसी परिवार द्वारा किए गए भ्रष्टाचार पर घमासान मचा हुआ है। दरअसल नीतीश कुमार ने जिस नैतिकता के आधार पर आरजेडी से अलग होकर महागठबंधन तोड़ दिया था, कांग्रेस के नाराज विधायक इसी नैतिकता को मानदंड बनाकर आरजेडी का साथ छोड़ना चाहते हैं। पार्टी के भीतर उथल-पुथल है और लालू विरोध के नाम पर टूट के कगार पर खड़ी है। खबर है कि बिहार में कांग्रेस के 14 विधायकों ने अलग अनौपचारिक समूह बना लिया है और अब वे सत्ताधारी जेडीयू में शामिल होने को तैयार हैं।

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नीतीश कुमार के साथ रहना चाहते हैं विधायक !
दरअसल टूट के ये कयास तभी से लगाये जा रहे हैं जब से नीतीश कुमार ने आरजेडी से अलग रास्ता अख्तियार किया और एनडीए में शामिल हो गए। हालांकि इसकी बुनियाद महागठबंधन बनते वक्त ही रखी गई थी। दरअसल बिहार कांग्रेस में महागठबंधन के वक्त से ही निराशा का माहौल तैयार होने लगा था। कांग्रेस के अधिकतर नेता किसी गठबंधन में नहीं जाना चाहते थे, उन्हें पार्टी के अस्तित्व की चिंता थी। लेकिन नीतीश कुमार की ‘उदार’ छवि की वजह से लोगों ने धैर्य का रास्ता अख्तियार कर रखा था। अब जब नीतीश ने रिश्ता तोड़ लिया तो कांग्रेस विधायकों की असमंजस खत्म हो गई और उनकी निराशा अब खुलकर सामने आने लगी है।

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कांग्रेस के वोटर नहीं चाहते आरजेडी का साथ!
दरअसल बिहार कांग्रेस का जनाधार अमूमन मुस्लिम और अगड़ी जातियों में माना जाता है। आरजेडी के साथ जाने को लेकर इस वोट बैंक का बड़ा तबका विरोध में था। पार्टी के कई नेताओं का अब भी मानना है कि कांग्रेस को अलग अस्तित्व बनाना चाहिए। दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि विभाग या कोई मलाईदार पद मिलने की लालच के कारण भी पार्टी टूट सकती है। कयास ये भी है कि इन कांग्रेसी विधायकों पर अगड़ी जातियों के वोटरों का भी दबाव है जो महागठबंधन की जीत से लालू प्रसाद यादव को लंबे समय बाद मिली राजनीतिक ताकत के कारण यादवों का दबदबा बढ़ने से काफी बेचैन हैं।

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कांग्रेस नेतृत्व की खोखली दलील में दम नहीं!
कांग्रेस किसी टूट से इनकार कर रही है और अपने आत्मविश्वास का प्रदर्शन कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। पार्टी के 2 बड़े नेता अशोक चौधरी और सदानंद सिंह केंद्रीय नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं।दरअसल पार्टी में टूट की आशंका को लेकर उसकी चिंता 11 अगस्त को ही सामने आ गई जब ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी विधायकों की नाराजगी दूर करने के लिए पटना पहुंच गए। सिंधिया सदानंद सिंह के घर गए, ताकि नाराज विधायकों के साथ-साथ खुद सदानंद सिंह का भी मिजाज भांपा जा सके। इस बीच गुरुवार को सदानंद सिंह दिल्ली में सोनिया गांधी से भी मिल चुके हैं। लेकिन नाराजगी दूर नहीं हुई है।

सोनिया गांधी

अशोक चौधरी और सदानंद सिंह नाराज !
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी के साथ नौ विधायक हैं और अशोक चौधरी का खेमा यह चाहता है कि कांग्रेस पार्टी बिहार में एकला चलो की राह पर चले। अशोक चौधरी खेमे के नेता लालू प्रसाद यादव के साथ गठबंधन में रहना नहीं चाहते। इधर विधायक दल के नेता सदानंद सिंह जी पार्टी के अंदर अपनी परीक्षा को लेकर नाराज हैं। उन्होंने गुरुवार को सोनिया गांधी से मिलकर ही अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। 

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… बस चार विधायकों की दरकार!
अशोक चौधरी और सदानंद सिंह दोनों अगर साथ मिल जाते हैं तो नाराज विधायकों की संख्या 15 के करीब हो जाती है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के लिए संकट को टालना आसान नहीं होगा। ये विधायक अपना एक अलग ग्रुप बनाकर पार्टी से निकलने की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें बस पार्टी के चार और विधायकों का इंतजार है, ताकि अपनी विधायकी बरकरार रखने के लिए वो दो तिहाई आंकड़े पार कर सकें। बिहार में कांग्रेस पार्टी के 27 विधायक हैं। चार और विधायकों के साथ आने के बाद कुल 18 विधायक बिहार कांग्रेस से टूटकर बाहर निकल जाएंगे।

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