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जब दुनिया भारत के खिलाफ थी तब भी ‘अटल’ जी ने किया था अपने नाम को सार्थक: प्रधानमंत्री मोदी

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में दिल्ली में सार्वजनिक, सर्वदलीय प्रार्थना सभा का आयोजन हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अवसर पर अपने पिता तुल्य नेता के प्रति अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कहा कि अटल जी सिर्फ नाम से अटल नहीं थे, उनके व्यवहार में भी रग- रग में हमेशा अटल भाव भरा नजर आता रहा।

किसी भी दबाव में देश को झुकने न दिया
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस आत्मविश्वास और हिम्मत के साथ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 11 मई, 1998 को पोखरण में अणु परीक्षण किया, वह उनके अटल होने का जीता-जागता उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस परीक्षण के लिए तैयारी बरसों पहले हो चुकी थी, लेकिन ये अटल थे जिन्होंने इस प्रकार का अटल निर्णय लेने का साहस दिखाया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 11 मई के बाद जिस प्रकार के प्रतिबंध लगाए गए, ऐसे में किसी का रुक जाना या झुक जाना स्वाभाविक था लेकिन ये अटल जी थे जिन्होंने 13 मई को दोबारा परीक्षण करके चुनौती दी थी कि भारत अटल है। यह एक ऐसी समझ थी जिसने विश्व मंच पर भारत की पहचान को स्थापित किया।

कश्मीर पर बदल दिया था विश्व का नैरेटिव
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समय था जब कश्मीर पर भारत को घेर लिया जाता था। लेकिन वाजपेयी जी ने विश्व के पूरे नैरेटिव को बदल दिया जिससे कश्मीर हट गया और आतंकवाद  चर्चा में आ गया। उनके इस कदम से आतंक के साथ कौन है और कौन नहीं, ये स्पष्ट हो गया। इस प्रकार वो आतंकवाद के मुद्दे पर पूरे विश्व को भारत के साथ लेकर आगे बढ़े।

सबको साथ लेकर निर्णय करने की अद्भुत क्षमता
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विकास के लिए पूरी राजनीतिक मर्यादाओं का पालन करते हुए राज्यों का विभाजन कैसे होता है यह देश ने अटल जी से सीखा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और झारखंड का विभाजन बिना किसी कटुता के संभव हो पाया तो यह पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की निर्णय क्षमता के चलते हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज तीनों राज्य राष्ट्र की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने में जिस प्रकार की बड़ी भूमिका निभा रहे हैं वह वाजपेयी जी की दीर्घदृष्टि, उनके नेतृत्व और कृतित्व का नतीजा है।

लोकतंत्र में क्षेत्रीय आकांक्षाओं का सम्मान किया
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की राजनीति में कभी छुआछूत का लंबा दौर था। यही वजह थी कि जब अटल जी की सरकार पहली बार बनी तो वह सिर्फ 13 दिन चली। कोई भी साथ आने को तैयार नहीं था, ऐसे में कोई भी राजनीति में हिल जाता लेकिन अटल जी को अपने आप पर, देश के जन सामान्य पर भरोसा था। देश की आशाओं-आकांक्षाओं की नब्ज पर भी उनकी पकड़ थी इसलिए वे रुके नहीं। जब कोई साथ चलने को तैयार नहीं था तो भारत जैसे लोकतंत्र में उन्होंने क्षेत्रीय आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए सबको साथ लेकर चलने का प्रयत्न किया और आज देश उसके साथ सफलतापूर्वक चल रहा है।

आज भी लोगों के दिलों पर छाए हैं अटल जी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 10 साल तक जो महापुरुष राजनीतिक मंच पर नजर नहीं आए, वह आज भी लोगों के दिलों पर कैसे राज करता है इसका एक एक बड़ा उदाहरण अभी-अभी देखने को मिला है। उन्होंने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले बजरंग पुनिया की बातों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के इस बेटे ने कभी अटल जी को नहीं देखा होगा, लेकिन गोल्ड मेडल जीतने के बाद उसने कहा कि वो अपना मेडल अटल जी को समर्पित करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे बड़ी जिंदगी की सफलता और ऊंचाई कोई और हो नहीं सकती है।

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