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प्रधानमंत्री मोदी की सख्ती से भ्रष्टाचारियों पर कस रहा शिकंजा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब केंद्र सरकार की कमान संभाली थी तो भारत की पहचान भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़े और आकंठ घोटालों में डूबे देश के तौर पर बन चुकी थी। यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार की वजह से देश में एक निराशा का माहौल था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ की नीति पर चलते हुए तमाम भ्रष्टाचारियों में खौफ पैदा कर दिया। दरअसल कहीं भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आते हैं तो केंद्र सरकार ने सख्ती से कदम उठाए हैं।

नीरव मोदी, विजय माल्या, ललित मोदी पर त्वरित कार्रवाई
नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के फर्जीवाड़े पर जिस तेजी से केंद्र सरकार ने कार्रवाई की है ऐसा केवल भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रतिबद्ध सरकार ही कर सकती है। जनवरी के आखिरी हफ्ते में नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के फर्जीवाड़े का जैसे ही पता लगा उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई और केस सीबीआई को सौंप दिया गया। फरवरी के दूसरे हफ्ते में नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के ठिकानों पर लगातार दबिश बढ़ाई गई और 12 फरवरी से 16 फरवरी के बीच दोनों की लगभग 1300 करोड़ संपत्ति जब्त कर ली गई और उनका पासपोर्ट सस्पेंड कर दिया गया है। इसके साथ ही नीरव मोदी और उनके कनेक्शन्स के प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग की जांच के दायरे में 200 शैल कंपनियां और बेनामी संपत्ति भी हैं। प्रवर्तन निदेशालय मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कम से कम दो दर्जन अचल संपत्तियों की कुर्की करने जा रही है।

इसके अलावा मुंबई, दिल्ली, पटना सब जगह रेड किया जा रहा है। सभी शो रूम को सील कर दिया गया है और विदेशों में शो-रूम को भी बंद करने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही उनके परिवार की 29 संपत्तियां और 105 बैंक अकाउंट भी जब्त कर लिया गया है।

विजय माल्या पर भी मोदी सरकार ने की थी त्वरित कार्रवाई
शराब कारोबारी विजय माल्या को 8,040 करोड़ का लोन उस वक्त दिया गया जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी। माल्या को सितंबर 2004 में लोन दिया गया था और फरवरी 2008 में उसकी समीक्षा की भी की गई थी। 2009 में कांग्रेस सरकार ने इतनी बड़ी राशि को डूबी हुई रकम बता दिया और उसे एनपीए घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं 2009 और 2016 में कांग्रेस सरकार ने फर्जी माल्या को राज्यसभा भेजकर सम्मानित भी किया। परन्तु, मोदी सरकार ने माल्या पर शिकंजा कसा तो वह लंदन भाग गया। अब तक कई जांच एजेंसियों से माल्या को समन भेजा जा चुका है। लेकिन सरकार ने उनका पीछा नहीं छोड़ा है।

केंद्र सरकार के निर्देश पर विदेश मंत्रालय ने माल्या का पासपोर्ट भी रद्द कर दिया। विजय माल्या से अपने लोन को वसूलने के लिए 17 बैंकों का कंसोर्टियम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व में कार्रवाई की जा रही है। माल्या की 6000 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त भी का जा चुकी है।  दूसरी ओर ब्रिटेन की सरकार से बात की जा रही है जिससे भगोड़े माल्या का प्रत्यर्पण करवाया जा सके।

ललित मोदी पर भी केंद्र सरकार ने की सख्त कार्रवाई
ललित मोदी पर आईपीएल में वित्तीय घोटाले के आरोप लगे और तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 2010 में फेमा के तहत मुकदमा दर्ज किया। जाहिर है के तहत मामला उन्हें बचाने के लिए किया गया। 2014 के मई तक कांग्रेस की सरकार ही केंद्र में रही, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अगर कांग्रेस की नीयत ठीक रहती तो ललित मोदी पर मनी लॉंड्रिंग के तहत कार्रवाई की जाती जिससे रुपये रिकवर होने के मौके अधिक होते और उन्हें सजा भी मिलती, लेकिन कांग्रेस सरकार ने ढिलाई बरती। इसके अलावा उनके विरुद्ध लाइट कॉर्नर नोटिस जारी किया गया जो कि घरेलू उड़ानों हवाई अड्डों को दिया जाता है। दरअसल कांग्रेस और ललित मोदी के बीच कितने गहरे ताल्लुकात हैं इन तस्वीरों से साफ समझा जा सकता है। ये तस्वीर फरार ललित मोदी की है जिनके साथ लंदन में राहुल गांधी और रॉबर्ट वाड्रा दोनों ही साथ हैं और करीब हैं। सवाल उठते हैं कि इस भगोड़े ललित मोदी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष और उनके बहनोई क्या कर रहे हैं?

अगर कांग्रेस चाहती तो उनके विरुद्ध रेड कॉर्नर या ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी कर सकती थी। हालांकि सरकार बदलने के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने उनपर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन वह कानून की खामियों का फायदा उठाकर फरार हो गया। बावजूद इसके केंद्र सरकार ने सख्ती की और उनकी संपत्तियों को जब्त कर लिया गया है। इसके साथ ही ब्रिटेन की सरकार से लगातार उसे वापस देश के कानून की गिरफ्त में लाने के लिए बातचीत कर रही है।

3500 करोड़ की बेनामी संपत्ति जब्त की गई
केंद्र की मोदी सरकार ने करप्शन और कालेधन को लेकर लगातार सख्ती की है । 2016 में बनाए गए बेनामी संपत्ति लेन-देन रोकथाम कानून के तहत आयकर विभाग ने 3,500 करोड़ रुपए से ज्यादा मूल्य की 900 से अधिक बेनामी संपत्तियां जब्त की हैं, इनमें से 2900 करोड़ की अचल संपत्तियां हैं। ये आंकड़े दिसंबर, 2017 तक के हैं।

1505 कंपनियों पर कंपनी एक्ट के तहत कार्रवाई
भ्रष्टाचार और कालेधन पर लगाम लगाने के लिए उठाए गए कदमों के तहत 65 अरब से भी अधिक संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर सरकार की नजर है। सरकार ने अब तक 2 लाख से भी अधिक कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। इसके साथ ही 1505 कंपनियों पर कंपनीज एक्ट का उल्लंघन के आरोप की जांच सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस द्वारा की जा रही है। जबकि 809 कंपनियों की जांच SEBI द्वारा की जा रही है।

मुखौटा कंपनियां और मोदी के लिए इमेज परिणाम

वर्तमान सरकार ने तो ऐसे मामलों से निबटने के लिए कई कानून बनाए हैं जो अपना काम कर रहे हैं। आइये जानते हैं सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कदमों को।

संपत्ति गुणवत्ता की समीक्षा (Asset Quality Review)
2015 की शुरुआत में, वर्तमान सरकार ने एसेट क्वालिटी रिव्यू (एक्यूआर) के बाद एनपीए की समस्या को मानते हुए वर्गीकृत किया। पीएसबी में एनपीए की सही मात्रा की मान्यता ने मार्च 2017 तक एनपीए की रकम 2.78 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7.33 लाख करोड़ रुपये की कर दी।

बैंकरप्सी कोड
वर्तमान केंद्र सरकार ने 2016 में बैंकरप्सी को बैंकरप्सी कोड के तहत लाया है। सरकार ने कोड 1 अक्टूबर, 2017 को नियामक के रूप में भारतीय दिवालियापन और दिवालियापन बोर्ड (आईबीबीआई) की स्थापना की है।

पीएसबी पुनर्पूंजीकरण (PSB Recapitalisation)
24 अक्टूबर 2017 को, अगले दो वर्षों में 2.11 लाख करोड़ रूपए की एक पूर्ण पीएसबी पुनर्पूंजीकरण योजना की घोषणा की गई। इसमें पूंजी अधिग्रहण योजना (capital infusion plan) का प्रमुख घटक (64%) के रूप में पुनर्पूंजीकरण बांड की घोषणा की गई। 24 जनवरी, 2018 को 88,000 करोड़ रुपये की पूंजी योजना की घोषणा के साथ, बैंक पुनर्पूंजीकरण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हुई।

एफआरडीआई विधेयक (FRDI Bill)
ड्राफ्ट एफआरडीआई विधेयक एक और सक्रिय कदम है, जहां एक संकल्प निगम (आरसी) प्रस्तावित किया गया है, जो कि वित्तीय संस्थानों में संकट की शुरुआती चेतावनी के संकेतों की पहचान करेगा। यह भविष्य में दिवालिया होने से वित्तीय संस्थानों की रक्षा करेगा, और यदि ऐसा हो, तो निपटने के लिए एक ढांचा प्रदान करेगा। आज तक कोई ऐसी प्रणाली भारत में मौजूद नहीं है।

फरार आर्थिक अपराधी विधेयक
आर्थिक अपराधियों को कानून के शिकंजे में कसने के इरादे से केंद्र सरकार ने ‘फरार आर्थिक अपराधियों’ की संपत्तियां जब्त करने के लिए कड़ा कानून बनाने का मसौदा जारी किया है। ‘फरार आर्थिक अपराधी विधेयक, 2017’ के मसौदे में प्रावधान किया गया है कि जो आर्थिक अपराधी भारतीय कानून से बचे रहते हैं, वे इस प्रक्रिया से न बच पाएं। संसद से पारित हो जाने के बाद यह विधेयक आर्थिक अपराधों से जुड़े अन्य कानूनों की जगह ले लेगा। इस मसौदे में धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष न्यायालय बनाने का प्रावधान है, जिससे किसी व्यक्ति को फरार आर्थिक अपराधी घोषित किया जा सके।

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