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केजरीवाल सरकार में एक और घोटाले की बू : रोजगार के नाम पर करोड़ों खर्च, नौकरी केवल 344 को

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बेहतर काम करने का ढोल पीटने वाले दिल्ली के विवादित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का ढोल विधानसभा के सत्र के दौरान फट गया है। रोजगार के नाम पर केजरीवाल सरकार का जो कारनामा सामने आया है वह किसी घोटाला से कम नहीं है। केजरीवाल सरकार ने रोजगार मेले को लेकर काम करने का खूब शोर शराबा किया। 7000 रोजगार मेले आयोजित करने, उसमें 375 कंपनियों के द्वारा लोगों को हायर करने की सूचना प्रचारित-प्रसारित किया गया लेकिन जब विधानसभा में सत्र के दौरान केजरीवाल सरकार ने जानकारी दी कि तीन साल में रोजगार मेले के नाम पर 33.11 करोड़ रुपए खर्च किए गए। और इसके बाद मात्र 344 लोगों को रोजगार मुहैया कराया गया है। राजनीति में नए कीर्तिमान स्थापित करने का वादा करने वाले अरविंद केजरीवाल ने रोजगार के नाम दिल्ली की जनता को धोखा दिया है।

दिल्ली के रोजगार कार्यालयों में 2.87 लाख लोगों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से मात्र आठ हजार नामों को नियोक्ताओं के वापस भेजा गया था। इनमें से भी जिन 344 लोगों को नौकरियां मिली उनमें से आधे कंडक्‍टर, वॉटरमैन और टेम्‍प्रेपरी वॉटरमैन पद पर नियुक्‍त किए गए। केजरीवाल सरकार के रोजगार मंत्री ने बताया कि 2015 में 176, 2016 में 102 और 2017 में 66 बेरोजगारों को नौकरियां दी गईं। 

दूसरी पार्टियों और उसके नेताओं पर आरोपों की झड़ी लगाने वाले अरविंद केजरीवाल, खुद ही घोटालों के दलदल में धंस रहे हैं। आइए देखते है केजरीवाल सरकार के कुछ घोटालों की लिस्ट-

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता 
जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की बात सामने आई है। यह अनियमितता आउटसोर्स या कांट्रेक्ट पर रखे गए कर्मचारियों से जुड़ी है। स्वास्थ्य विभाग में 15 हजार कर्मचारियों को आउटसोर्स पर रखा है, लेकिन ठेकेदार इन कर्मचारियों को ईपीएफ (इंप्लॉई प्रोविडेंट फंड), इंश्योरेंस और बोनस का लाभ नहीं दे रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और ठेकेदारों के बीच साठ-गांठ के जरिए हजारों करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। इतना ही नहीं कामगारों का शोषण भी किया गया।

 

पीडब्ल्यूडी घोटाले में केजरीवाल का रिश्तेदार गिरफ्तार
घोटाला और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे पर भरोसा करके दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल का सिर पर बिठाया लेकिन सत्ता में आते ही केजरीवाल का चेहरा बेनकाब होने लगा है। हाल ही में पीडब्ल्यूडी घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के साढू सुरेन्द्र बंसल के बेटे विनय बंसल को एसीबी ने गिरफ्तार किया। मुख्यमंत्री के रिश्तेदार पर जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कंपनियों के नाम से ठेके लेने और उसके लिए जाली बिल बनाकर सरकारी खजाना लूटने का आरोप का आरोप है। इस मामले में एसीबी ने तीन एफआईआर दर्ज की थी। जिनमें से एक सुरेंद्र बंसल की कंपनी के खिलाफ थी। एसीबी ने पिछले साल 9 मई को कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। 

करोड़ों की बेनामी संपत्ति का खुलासा
सीबीआई ने हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के विभाग से जुड़ी दिल्ली डेंटल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ ऋषि राज और काउंसिल के वकील प्रदीप शर्मा को 4.73 लाख रुपये रिश्र्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। मामले में अहम बात यह है कि रजिस्ट्रार के लॉकर से करोड़ों की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं, जो सत्येंद्र जैन और उनकी पत्नी के नाम पर हैं। जागरण के अनुसार रजिस्ट्रार के लॉकर से सत्येंद्र जैन की तीन संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। इनमें 12 बीघा दो बिस्वा और आठ बीघा 17 बिस्वा जमीन की खरीद के दस्तावेज और 14 बीघा जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी के कागज हैं। ये जमीनें बाहरी दिल्ली के कराला गांव में हैं। इसके अलावा, सीबीआइ के हाथ दो करोड़ रुपये की बैंक की डिपॉजिट स्लिप बुक भी मिली है। इसके जरिये वर्ष 2011 में रुपये जमा कराये गए थे। यह डिपॉजिट स्लिप जैन, उनके परिवार व उन कंपनियों के नाम हैं, जिनमें जैन निदेशक थे। इसके अलावा, सत्येंद्र जैन व उनकी पत्नी के नाम की 41 चेक बुक भी मिली हैं। आयकर विभाग ने पहले से ही बाहरी दिल्ली में सत्येंद्र जैन की कथित 220 बीघा जमीन बेनामी संपत्ति अधिनियम के तहत जब्त कर रखी है। साथ ही भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई में उनके खिलाफ पहले ही मामला दर्ज है। जांच एजेंसी उनके खिलाफ हवाला ऑपरेटरों से संबंधों और काले धन को सफेद करने के लिए बोगस कंपनियां बनाने के मामले में भी जांच कर रही है।

स्वास्थ्य मंत्री का घोटाला छिपाया!
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ आयकर विभाग की जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। उनपर पर हवाला के जरिए 16.39 करोड़ रुपये मंगाने का आरोप है। इन मामलों में उनकी सघन जांच हो रही है। इसके अलावा जैन पर अपनी ही बेटी को दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक परियोजना में सलाहकार बनाने का भी आरोप है। इस केस की जांच भी सीबीआई के जिम्मे है। शुंगलू कमेटी ने भी इस मामले में दिल्ली सरकार पर उंगली उठाई है। यहां ये बताना आवश्यक है कि केजरीवाल के पूर्व सहयोगी कपिल मिश्रा ने इन्हीं पर केजरीवाल को पैसे देने के आरोप लगाए हैं। मिश्रा के अनुसार जैन ने अपनी करतूतों पर पर्दा डाले रखने के लिए केजरीवाल के किसी रिश्तेदार की 50 करोड़ रुपये की डील भी कराई है।

दवा घोटाला
केजरीवाल सरकार ने अपनी मोहल्ला क्लीनिक का खूब ढिंढोरा पीटा है। वो दावा करते रहे हैं कि गरीब जनता के स्वास्थ्य के ख्याल से उठाया गया ये कदम बहुत फायदेमंद साबित होगा। लेकिन अब पता चल रहा है कि केजरीवाल और उनके गैंग के लोग भले ही इसका फायदा उठा रहे हों, उनकी गंदी नीयत के चलते अब गरीबों की जान पर बन आई है। इसका खुलासा तब हुआ जब 1 जून, 2017 को एसीबी ने दवा प्रोक्योरमेंट एजेंसी के ताहिरपुर, जनकपुरी और रघुवीर नगर स्थित सेंटर के गोदामों पर छापा मारा। एसीबी को यहां से भारी मात्र में एक्सपाइरी मेडिसिन के साथ दवाओं की खरीद-फरोख्त के बिल भी मिले हैं। ये दवा घोटाला करीब 300 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि विवादित सीएम ने अपने खासम-खास और कई घोटालों के आरोपी स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के दबाव में ही दवाई खरीदने का काम मेडिकल सुपरिन्टेंडेन्ट से छीनकर, सेन्ट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी को दे दिया था। यानी लूट के लिए ऊपर से नीचे तक पूरी तैयारी की गई थी।

मोहल्ला क्लिनिक घोटाला
मोहल्ला क्लीनिक को लेकर एबीपी न्यूज ने एक बड़ा खुलासा किया।
एबीपी न्यूज के अनुसार दिल्ली में आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक वैसे तो लोगों की सुविधाओं के लिए बनाया गया, लेकिन मोहल्ला क्लीनिक की हालत ही ठीक नहीं है। विजिलेंस विभाग इसमें धांधली की जांच कर रहा है। विजिलेंस की जांच का दायरे में दो मुख्य आरोप हैं।

  1. मोहल्ला क्लीनिक परिसर का किराया बाजार किराए से ज्यादा क्यों है?
  2. पार्टी कार्यकर्ताओं के परिसर किराए पर क्यों लिए गए?         

एबीपी न्यूज की पड़ताल में पता चला कि कार्यकर्ता अपने मकान को बाजार दर से दो से तीन गुना ज्यादा किराये पर मोहल्ला क्लीनिक को दिए हुए हैं। इस तरह से मोहल्ला क्लीनिक खोलने में आम आदमी पार्टी के नेताओं को जमकर फायदा पहुंचाया गया है.दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन का आरोप है कि मोहल्ला क्लिनिक एक बड़ा घोटाला है। माकन ने आरोप लगाया कि ये क्लिनिक ‘आप’ कार्यकर्ताओं की बिल्डिंगों में चलाए जा रहे हैं। उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए मार्केट से कई गुना ज्यादा किराया दिया जा रहा है।

खुद केजरीवाल पर रिश्वत लेने का आरोप
सीएम अरविंद केजरीवाल सरकार पर भ्रष्टाचार का ये सबसे गंभीर आरोप है। जो आदमी भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को भुनाकर मुख्यमंत्री बना उसके अपने ही कैबिनेट सहयोगी ने 2 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया। सबसे बड़ी बात ये है कि कपिल मिश्रा ने केजरीवाल से जिस व्यक्ति से रिश्वत लेने का आरोप लगाया, वो उन्हीं की सरकार में सीएम के चहते मंत्री सत्येंद्र जैन हैं। कपिल मिश्रा के आरोपों में कितना दम है ये तो जांच के बाद पता चलेगा। लेकिन कुछ तथ्य ऐसे हैं जिससे ईमानदारी का चोला ओढ़े केजरीवाल की कलई खुल जाती है। जैसे इतने गंभीर आरोप पर न तो उन्होंने ठीक से सफाई देने की जरूरत समझी और न ही कपिल मिश्रा के विरोध में किसी कानूनी कार्रवाई की ही हिम्मत जुटा पाए।

हवाला के जरिए पैसे जुटाने का आरोप
दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा दावा कर चुके हैं कि केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने फर्जी कंपनी बनाकर हवाला के जरिए पैसा जुटाया है। उन्होंने इसके संबंध में दस्तावेज होने के भी दावे किए हैं। यही नहीं कपिल मिश्रा ने पार्टी के नेताओं के विदेश यात्राओं की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि केजरीवाल ने अबतक सार्वजनिक रूप से कपिल मिश्रा के एक भी सवाल का जवाब देने की हिम्मत नहीं दिखाई है।

सीएनजी घोटाला
केजरीवाल सरकार में मंत्री रह चुके कपिल मिश्रा ने दिल्ली सरकार के एक और बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया। अंग्रेजी समाचार पोर्टल टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में 10,000 कारों में जो सीएनजी किट लगावाए हैं, वो फर्जी कंपनी ने तैयार किए हैं। ये सारे सीएनजी किट 10 महीनों के भीतर कारों में फिट किए गए थे। सबसे बड़ी बात ये है कि फर्जी सीएनजी किट कंपनी को इसका ठेका ऑड-इवन के फौरन बाद दिया गया था। जाहिर है कि इसके समय को लेकर भी दिल्ली सरकार की मंशा संदेहों से परे नहीं है। अपने आरोपों के समर्थन में कपिल ने कुछ दस्तावेज भी दिखाए।

विज्ञापन घोटाला
केजरीवाल पर विज्ञापनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का भी आरोप है। इसके लिए उनकी पार्टी से 97 करोड़ रुपये वसूले भी जाने हैं। जांच में पाया गया है कि सरकारी विज्ञापनों के माध्यम से केजरीवाल ने अपनी और अपनी पार्टी का चेहरा चमकाने की कोशिश की है। इनमें से उनकी पार्टी की ओर से दिए गए कई झूठे और बेबुनियाद विज्ञापन भी शामिल हैं। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार भी केजरीवाल सरकार पर दूसरे राज्यों में अपने दल का प्रचार करने के लिए दिल्ली की जनता के खजाने पर डाका डालने का आरोप है। पहले साल के काम-काज पर तैयार रिपोर्ट कहती है कि पहले ही साल में केजरीवाल सरकार ने 29 करोड़ रुपये दूसरे राज्यों में अपने दल के विज्ञापन पर खर्च किए। 2015-16 में केजरीवाल ने जनता के 522 करोड़ रुपये विज्ञापन पर खर्च कर किए थे।

‘टॉक टू ए के’ घोटाला
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ भी सीबीआई भ्रष्टाचार के मामले दर्ज कर जांच कर रही है। आरोपों के अनुसार सिसोदिया ने केजरीवाल के टॉक टू एके कार्यक्रम के प्रचार के लिए 1.5 करोड़ रुपये में एक पब्लिक रिलेशन कंपनी को काम सौंप दिया। जबकि मुख्य सचिव ने इसके लिए इजाजत नहीं देने को कहा था।

बीआरटी कॉरीडोर तोड़ने का घोटाला
केजरीवाल सरकार पर दिल्ली में बीआरटी कॉरीडोर को तोड़ने के लिए दिए गए ठेके में भी धांधली का आरोप लग चुका है। आरोपों के अनुसार इस मामले में दिल्ली सरकार ने ठेकेदार को तय रकम के अलावा कंक्रीट और लोहे का मलबा भी दे दिया, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये में थी। इस मामले में पिछले साल एसीबी छापेमारी करके कुछ दस्तावेज भी जब्त कर चुकी है।

स्ट्रीट लाइट घोटाला
आम आदमी पार्टी नेता राखी बिड़लान पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। आरोपों के अनुसार उन्होंने मंगोलपुरी में 15 हजार की सोलर स्ट्रीट लाइट को एक लाख रुपये और 10 हजार में लगने वाली सीसीटीवी कैमरों पर सरकार के 6 लाख रुपये उड़ा दिए। जब आम आदमी पार्टी में केजरीवाल की मर्जी के बगैर एक पत्ता भी नहीं हिलता है तो फिर राखी पर लगे आरोपों की सही जांच होने देने से किसने रोका है ?

संसदीय सचिव घोटाला ?
13 मार्च, 2015 को आप सरकार ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बना दिया। ये जानते हुए भी कि यह लाभ का पद है, उन्होंने ये कदम उठाया। दरअसल उनकी मंशा अपने सभी साथियों को प्रसन्न रखना था। उनका इरादा अपने विधायकों को लालबत्ती वाली गाड़ी, ऑफिस और अन्य सरकारी सुविधाओं से लैस करना था, ताकि उनके ये भ्रष्ट साथी ऐश कर सकें। लेकिन कोर्ट में चुनौती मिली तो इनकी हेकड़ी गुम हो गई। हालांकि केजरीवाल सरकार ने ऐसा कानून भी बनाने की कोशिश कि जिससे संसदीय सचिव का पद संवैधानिक हो जाए। लेकिन हाई कोर्ट के आदेश से मजबूर होकर ये फैसला निरस्त करना पड़ा। अब इन विधायकों की सदस्यता खत्म की जा चुकी है। 

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