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मोदी सरकार में रेलवे का चहुंमुखी विकास, बेहतर सेवा और सुरक्षा से रेल का सफर सुहाना

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में लगातार रेलवे के कायाकल्प की कोशिशें चल रही हैं। पिछले साढ़े तीन साल में सरकार ने ऐसे कई कदम उठाए हैं, जिससे भारतीय रेलवे की स्थिति बहुत बेहतर हुई है। मोदी सरकार की हमेशा से प्राथमिकता रही है कि रेल का सफर सुहाना होने के साथ-साथ पूरी तरह सुरक्षित भी हो। इसी सोच के तहत अब रेल हादसों को रोकने के इरादे से इंजनों में मॉडर्न तकनीक पर आधारित 12,000 करोड़ की सुरक्षा प्रणाली लगाने का फैसला किया है। हाल के कुछ ट्रेन हादसों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने ये कदम उठाया है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने रेलवे को एक ऐसा इंजन बनाने का लक्ष्‍य रखा है जो नये भारत की दिशा में देश की विकास यात्रा को नई गति प्रदान करेगी।

हादसा रोकने के लिए सर्वोत्तम पहल
प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने ट्रेन के इलेक्ट्रिक इंजनों में यूरोपियन ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लगाकर उसे पहले से कहीं अधिक सुरक्षित बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए केंद्र सरकार ने भारतीय रेलवे के लिए 12 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार रेलवे के 6 हजार इलेक्ट्रिक इंजनों में अत्याधुनिक यूरोपीय ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ETCS) यानी लेवल-2 लगाने की योजना है। इस सिस्टम से ड्राइवरों को ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने में सहायता मिलेगी। इसके अलावा देश के चार मेट्रो शहरों को जोड़ने वाले 9,054 किलोमीटर लंबे स्वर्णिम चतुर्भुज रूट पर भी वही सिस्टम लगाने का फैसला किया गया है, जिससे इस कॉरिडोर को हादसों से मुक्ति दिलाई जा सके। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 12 हजार करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। माना जा रहा है कि इस सिस्टम से न केवल ट्रेनों को दुर्घटनाओं से बचाया जा सकेगा, बल्कि उनकी गति बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

‘बिजली ट्रैक्शन ऊर्जा बिल’ से 41 हजार करोड़ की बचत का अनुमान
बिजली ट्रैक्‍शन ऊर्जा बिल घटाने की रणनीति अपनाते हुए भारतीय रेल के लिए सीधे बिजली खरीदने से अप्रैल 2015 से अक्‍टूबर 2017 तक 5,636 करोड़ रुपये की बचत हुई है। यह आंकड़ा चालू वित्‍त वर्ष के अंत तक यानी मार्च 2018 तक बढ़कर 6,927 करोड़ रुपये हो सकता है। यह निर्धारित लक्ष्‍य से लगभग हजार करोड़ रुपये अधिक है। अनुमान है कि अगर बचत की यह प्रक्रिया यूं ही जारी रही, तो 2015-2025 के बीच इसका आंकड़ा 41,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। रेलवे ने इसे मिशन- 41,000 नाम दिया है।

भर्ती प्रक्रिया को तेज और आसान बना रहा है रेलवे
कर्मचारियों की कमी की स्थिति को ठीक करने के लिए भारतीय रेलवे भर्ती की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने के विकल्पों पर काम कर रहा है। जानकारी के अनुसार नई प्रणाली अपनाए जाने के बाद 2 साल वाली भर्ती प्रक्रिया, मात्र 6 महीने में ही पूरी हो जाएगी। इस प्रक्रिया में बाकी चीजों के अलावा ऑनलाइन टेस्ट की प्रक्रिया अपनाना भी शामिल है। करीब 13 लाख लोगों को रोजगार देने वाले रेलवे में अभी 2.25 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर मौजूद हैं। उम्मीद है कि जैसे ही रेलवे नई प्रक्रिया को अपना लेगा अगले साल तक लाखों युवाओं का भविष्य संवरने का रास्ता साफ हो जाएगा।

सौर ऊर्जा ट्रेन से परिचालन लागत घटा, पर्यावरण को मिली सुरक्षा
पीएम मोदी के कार्यकाल में ही देश में सौर ऊर्जा से चलने वाली ट्रेन भी चलाई गई है। पहली ट्रेन इसी साल जुलाई में दिल्ली के सफदरजंग स्टेशन से गुरुग्राम के फारुख नगर के लिए रवाना की गई। सौर ऊर्जा से संचालित डिब्बों और बैटरी बैंक की अनूठी सुविधा से युक्त इस 1600 एचपी डीईएमयू (डीजल इलेक्ट्रिक मल्टी यूनिट) ट्रेन के डिब्बों में प्रकाश, पंखे और सूचना डिस्प्ले प्रणाली संबंधी सभी जरूरतें ट्रेन की छतों पर लगे सौर पैनलों से पूरी की जाती हैं। सौर ऊर्जा से चलने वाली 6 ट्रेलर कोच वाली डीईएमयू से हर साल लगभग 21,000 लीटर डीजल की बचत होगी और इस प्रकार प्रति वर्ष 12 लाख रुपये की बचत होगी।

विक्रेताओं-ठेकेदारों के लिए ऑनलाइन बिल ट्रेकिंग प्रणाली
हर क्षेत्र में पारदर्शिता और सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के प्रधानमंत्री मोदी के विजन के तहत ही अब रेलवे में विक्रेताओं-ठेकेदारों के लिए ऑनलाइन बिल ट्रेकिंग प्रणाली भी शुरू कर दी गई है। इसके अंतर्गत सभी बिलों को 30 दिन के अंदर निपटाने का प्रावधान है। इस प्रणाली के शुरू होने से विक्रेता और ठेकेदार अपने बिल, उसकी रकम और बाकी सभी ब्यौरा आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।

कंफर्म टिकट के लिए ‘विकल्प’ योजना
भारतीय रेलवे ने इसी साल से नए रेल रिजर्वेशन सिस्टम ‘विकल्प’ की शुरुआत की है। इस स्कीम के अनुसार अब ई-टिकट बुक करते वक्त वेट-लिस्ट होने पर यात्रियों को ‘विकल्प’ चुनने का अवसर मिलता। यानी रिजर्वेशन चार्ट निकलते वक्त तक भी अगर उसका टिकट कंफर्म नहीं हुआ तो उस यात्री को उसी डेस्टिनेशन के लिए राजधानी, शताब्दी या दूसरी प्रीमियम/स्पेशल ट्रेनों में बर्थ उपलब्ध रहने पर कंफर्म टिकट दिया जाता है। सबसे बड़ी बात ये है कि इसके लिए रेलवे कोई अतिरिक्त चार्ज भी नहीं लेता है। इस व्यवस्था से यात्रियों को कंफर्म टिकट पर सफर की सुविधा मिलती है, साथ ही ट्रेन में कोई बर्थ खाली भी नहीं बचता है और रेलवे को वेटिंग लिस्ट वालों को पैसा भी नहीं लौटाना पड़ता है। इस योजना से रेलवे को सालाना करीब 7,500 करोड़ बचेगा, जो रिफंड में वापस करना पड़ता था।

IRCTC से टिकट खरीदना हुआ सस्ता
नए वित्त वर्ष से ई-टिकट खरीदने वाले रेल यात्रियों को कोई सर्विस टैक्स नहीं देना पड़ता है। पहले IRCTC की वेबसाइट से ई-टिकट बुक करने पर रेल यात्रियों को आमतौर पर स्लीपर क्लास के लिए 20 रुपये और एसी क्लास की टिकटों पर 40 रुपये तक सर्विस चार्ज देना होता था। मोदी सरकार की इस पहल से कई फायदे हुए है। ई-टिकट लेने वालों को तो लाभ मिल ही रहा है, रिजर्वेशन काउंटर पर भी भीड़ घटी है और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा भी मिला है। अब IRCTC से ऑनलाइन टिकट बुकिंग की रफ्तार भी प्रति मिनट 15,000 टिकट की जा चुकी है, जिससे बुकिंग का काम बेहद आसान हो गया है।

ATM से भी रेल टिकट
जो रेल यात्री रेलवे काउंटर से टिकट खरीदते रहे हैं उनके लिए रेलवे बैंक ATM से भी टिकट देने की योजना पर काम कर रहा है। इस सुविधा के शुरू होते ही लाखों रेल यात्रियों को काउंटर की लाइन से छुटकारा मिल जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक SBI के साथ रेलवे ने इसको लेकर एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था जिसके अब नतीजे भी आने लगे हैं। ये भी जानकारी है कि सेंटर फॉर रेलवे इन्फार्मेशन सिस्टम (CRIS) इसके लिए सॉफ्टवेयर तैयार कर रहा है।

सुहाने सफर में ताजा खाना
भारतीय रेलवे खानपान की गुणवत्ता को लेकर हमेशा ही शिकायतों से जूझता रहा है, लेकिन मोदी सरकार इस व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त करने का इंतजाम कर रही है। इसके लिए रेलवे ने हर दो घंटों के बाद ‘बेस किचेन’ में तैयार किया गया ताजा खाना यात्रियों को परोसने की व्यापक योजना तैयार की है। इसके लिए रेलवे ने नई खान-पान नीति लागू करते हुए खाना पकाने और उसके वितरण की व्यवस्था को अलग कर दिया है और IRCTC को ही इसकी जिम्मेदारी सौंप दी है। आपको बता दें कि भारतीय रेल प्रतिदिन करीब 11 लाख यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराती है।

नई कैटरिंग पॉलिसी से ठेकेदारों पर लगाम
रेल यात्रियों की शिकायत खाने की गुणवत्ता के साथ-साथ उसके दाम को लेकर भी रही है। अक्सर यात्रियों को पता ही नहीं रहता है कि कैटरिंग स्टाफ खाने की जो कीमत वसूलता है असल में उसका दाम कितना है। ये एक ऐसा विषय है जिसमें अबतक ठेकेदारों की मनमानी चलती थी और विरोध करने वाले यात्रियों को उनकी गुंडागर्दी का भी सामना करना पड़ता था। इसी कमी को दूर करने के लिए रेल मंत्रालय ने अब किसी ठेकेदार को नए लाइसेंस जारी नहीं करने का फैसला किया है। IRCTC अब कीमतों में पारदर्शिता रखेने, यात्रियों से किसी भी स्थिति में ज्यादा कीमत नहीं वसूलने और ग्राहकों को बिल देने की भी व्यवस्था की है।

स्टेशनों पर मुफ्त वाईफाई सेवा
रेलवे ने देशभर के सौ से भी ज्यादा स्टेशनों पर मुफ्त वाईफाई की सेवा उपलब्ध करवाई है। इस साल से 50 लाख से भी अधिक रेल यात्री इस सेवा का लाभ उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में भारतीय रेल इस सुविधा को चलती ट्रेनों में भी उपलब्ध करवाने की योजना पर काम कर रहा है। यही नहीं रेलवे ने अपनी सहायक कंपनी रेलटेल को 400 और रेलवे स्टेशनों पर वाईफाई सुविधा लागू कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। इस योजना को ‘रेलवायर साथी’ का नाम दिया गया है, जो डिजिटल इंडिया के लिए PCO की तरह काम कर सकेगा। यहां से लोगों को ई-कॉमर्स, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-टिकटिंग और ऐसी ही दूसरी सेवाओं के उपयोग में मदद मिलेगी।

अपने दम पर ‘ट्रेनसेट’ बना रहा है रेलवे
भारतीय रेलवे खुद से बिना इंजन वाला ट्रेनसेट बना रहा है जिसकी रफ्तार 160 कि.मी प्रति घंटे की होगी। काफी हद तक ये ट्रेनसेट दिल्ली मेट्रो की तरह होगा जिसमें कई डिब्बे होंगे और वो खुद में लगी संचालक प्रणाली के जरिए ही दौड़ेगा। ‘ट्रेन-2018’ देश का पहला ट्रेनसेट होगा, जिसके अगले साल मार्च तक तैयार हो जाने की संभावना है और सबसे पहले इसे दिल्ली-लखनऊ या दिल्ली-चंडीगढ़ रूट पर चलाया जा सकता है।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का होगा कायाकल्प
रेलवे नई दिल्ली स्टेशन को वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाने की महत्वाकांक्षी योजना की तैयारियों में जुटा है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन पांच लाख से ज्यादा यात्री आते हैं और रोजाना 361 ट्रेनों का दबाव रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए तीन मंजिला स्टेशन इमारत बनाने की योजना है जिसमें आगमन और प्रस्थान के लिए अलग-अलग सेक्शन होंगे। दक्षिण कोरिया के सहयोग से 10,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार होने के बाद इस स्टेशन पर डिजिटल साइनेज, स्केलेटर्स, लिफ्ट, ऑटोमेटिक सेल्फ टिकटिंग काउंटर, एग्जिक्यूटिव लाउंज जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यही सुविधाजनक यात्रा सुविधा मुहैया कराने के साथ ही यात्रियों को विश्वस्तरीय खरीददारी की सुविधा भी दी जाएगी। इसके लिए स्टेशन के अजमेरी गेट की ओर व्यावसायिक इस्तेमाल वाली तीन गगनचुंबी इमारतें बनाई जाएंगी।

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