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एजेंडा पत्रकार सागरिका घोष ने गिराया पत्रकारिता का स्तर

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देश में जनता के प्रश्नों को आवाज देने का दम तो सभी पत्रकार भरते हैं, लेकिन इन प्रश्नों को उठाने में उनमें से कुछ के लिए अपना स्वार्थ सर्वोपरि होता है। पत्रकार, जब अपने स्वार्थों को साधने के लिए राजनीतिक खेमेबंदी करने लगते हैं, तो उनकी पत्रकारिता में एजेंडा हावी हो जाता है। अंग्रेजी की एक ऐसी ही जानी मानी पत्रकार हैं- सागरिका घोष, जो पहले सीएनएन-आइबीएन में एंकर हुआ करती थीं, आजकल टाइम्स आफ इंडिया में कंसल्टिंग एडिटर हैं। आजकल, ये अपनी किताब- Indira, India’s Most Powerful Prime Minister- को सोशल मीडिया पर चमकाने के काम में अधिक जुटी हुई हैं।

सागरिका, वैसे तो अपने को निष्पक्ष रखने का दंभ भरती हैं, लेकिन ऐसे कई मौके आए हैं जब अपनी निष्पक्षता को दरकिनार कर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विरोधी एजेंडें को हवा देने का काम करती हैं। निष्पक्षता का लिबास ओढ़कर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ नकारात्मक पत्रकारिता करने की इनकी मंशा साफ नजर आती है। आइये, देखते हैं कैसे सागरिका घोष प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ नकारात्मकता को अपना एजेंडा बनाती रही हैं-

सागरिका का एजेंडा-1
सागरिका घोष, मोदी सरकार की नीतियों का विरोध करने के लिए कुतर्कों का सहारा लेती हैं। 16 जनवरी, 2018 को Twitter पर पासपोर्ट के रंग बदले जाने की खबर पर लिखा कि सभी तरह के पासपोर्ट का रंग एक जैसा होना चाहिए और अलग-अलग रंग के पासपोर्ट समतामूलक समाज के मूल्यों के विरुद्ध हैं। जबकि सच्चाई यह है कि पासपोर्ट का रंग सरकारी कामकाज को सरल बनाने के लिए है। जब तक सरकारी तंत्र सरल नहीं होगा तब तक समतामूलक समाज कैसे बनेगा? लेकिन सागरिका को तो अपने एजेडें में यह नहीं दिखता।

सागरिका का एजेंडा-2
15 जनवरी को सागरिका ने Twitter पर एक Tweet के प्रश्न का जवाब देते हुए जो कुछ लिखा उससे साफ हो जाता है कि इनकी निष्पक्ष पत्रकारिता कितनी पक्षपातपूर्ण होती है और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ एजेंडे को आगे बढ़ाती है।

सागरिका का एजेंडा-3
सर्वोच्च न्यायालय के चार न्यायधीशों ने जिस तरह से मुख्य न्यायधीश के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बाद में उन चारों ने भी माना कि ऐसी प्रेस कॉन्फ्रेंस किसी भी तरीके से उचित नहीं थी, इसके बावजूद सागरिका घोष ने 12 जनवरी को Tweet के जरिए प्रधानमंत्री मोदी विरोधी एजेंडा जारी रखा।

सागरिका का एजेंडा-4
प्रधानमंत्री मोदी की किसी भी नीति पर विरोधी एजेंडे को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है, इसका सबसे अच्छा नमूना, सागरिका ने अपने 3 जनवरी के Tweet में दिखाया। तीन तलाक को कानूनी रुप से अपराध घोषित करके मुस्लिम महिलाओं को अधिकार देने वाला विधेयक जब लोकसभा से पारित हुआ तो सागरिका ने लिखा –

सागरिका का एजेंडा-5
जिग्नेश मेवाणी की दिल्ली में हुई रैली का सहारा लेकर सागरिका ने 10 जनवरी को जो Tweets किए, उससे साफ होता कि रिपोर्टिंग की आड़ में वो कैसे प्रधानमंत्री मोदी के विरोध का एजेंडा चलाती हैं।

सागरिका का एजेंडा-6
सागरिका का एक ही एजेंडा होता है कि कैसे प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों को गलत साबित किया जाए। आधार संख्या, जिसकी शुरुआत यूपीए सरकार में हुई थी, लेकिन लचर शासन के चलते कांग्रेस इसे लागू नहीं कर सकी। जबकि मोदी सरकार लगन और मेहनत से इसे पूरी तरह से लागू कर रही है, तो उसका विरोध करने के लिए सागरिका घोष नये-नये कुतर्क रच रही हैं। 8 जनवरी को अमर्यादित Tweet में आधार योजना को पागलपन से भरा कह डाला। जबकि इस आधार संख्या के जरिए गरीबों के लिए बनायी गई योजनाओं के लाभ का उचित वितरण संभव हो रहा है और सरकारी सेवाऐं सरल और सुगम हो रही हैं।

सागरिका का एजेंडा-7
यूपीए सरकार के दौरान हुए 2G घोटाले पर आए फैसले ने सागरिका को प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने का एक और मौका दे दिया। इसी 2G घोटाले के कारण सर्वोच्च न्यायलय ने 122 स्पेक्ट्रम आवंटन को रद्द कर दिया था, लेकिन सागरिका ने निचली अदालत के निर्णय को अंतिम निर्णय मानते हुए, प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए लिखा-

सागरिका का एजेंडा-8
गुजरात चुनाव के दौरान सागरिका ने प्रधानमंत्री मोदी के विरोध के एजेंडे को मजबूत करने के लिए जिस तरह से ईवीएम को आधार बनाकार प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा, उससे साफ हो जाता है कि अपनी एजेंडा पत्रकारिता के लिए ये किस हद तक जा सकती हैं। चुनाव के बाद, ईवीएम को लेकर सागरिका की सारी बातें झूठी निकली, लेकिन चुनाव के दौरान वो प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ हवा बनाने में जुटी रही थीं-

सागरिका का एजेंडा-9
सागरिका, बड़ी ही शातिर अंदाज में अपना एजेंडा चलाती हैं। 27 नवंबर, 2017 के Tweet में Jean Dreze की बात को Tweet करके गुजरात के विकास मॉडल को आधार बनाकर प्रधानमंत्री मोदी के विरोध का एजेंडा आगे बढ़ाया। सागरिका, उन सभी बातों को चुनकर अपने Tweets पर लिखती हैं, जिससे प्रधानमंत्री मोदी की छवि नकारात्मक बने।

सागरिका का एजेंडा-10
21 नवंबर के Tweet में सागरिका ने सोनिया-मनमोहन के दो शक्ति केन्द्र को सही ठहराते हुए प्रधानमंत्री मोदी के शासन करने के तरीके को गलत साबित करने का प्रयास किया। एजेंडा पत्रकारिता में वो इतनी अंधी हो चुकी हैं कि जिस प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली को जनता और सभी विरोधी भी सम्मान देते हैं, उसे गलत साबित करने पर तुली हैं।


सागरिका की एजेंडा पत्रकारिता ने देश में पत्रकारिता का स्तर नीचे गिराया है और जनता के मन में तथाकथित निष्पक्ष पत्रकारों के प्रति अविश्वास और घृणा का भाव पैदा किया है।

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