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15 अगस्त पर एक नजर मोदी सरकार की उन 15 उपलब्धियों पर जिनसे देश के चेहरे पर लौटी चमक

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मौजूदा सरकार ने देश की बागडोर संभालने के साथ सुधार और परिवर्तन के कदम उठाने शुरू कर दिए थे। आज उनका असर ये है कि देश के सामान्य जनजीवन में नया दौर आ चुका है और नए भारत का निर्माण हो रहा है। एक ऐसा भारत जिसका सपना आजादी के आंदोलन में अपना अमिट योगदान देने वाले हमारे महापुरुषों ने देखा था। इस सरकार में गवर्नेंस का मूल सिद्धांत ‘सबका साथ सबका विकास’ रहा है और तमाम योजनाओं के केंद्र में समाज के आखिरी छोर का व्यक्ति रहा है। आइए स्वतंत्रता दिवस के इस अवसर पर एक नजर डालते हैं मोदी सरकार की 15 उन उपलब्धियों पर जिनसे देश के चेहरे में गजब की रौनक आई है।  

1. गरीब से गरीब के लिए भी समुचित स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रबंध – मोदी सरकार ने आयुष्मान भारत के नाम से एक ऐसी हेल्थ स्कीम लाने का काम किया है जिससे गरीब से गरीब का इलाज भी संभव हो सकेगा। इससे इलाज के खर्च की चिंता खत्म हो गई है। परिवार में किसी के भी बीमार पड़ने पर साल में 5 लाख रुपये का खर्च भारत सरकार और इंश्योरेंस कंपनी मिलकर देगी। देश के लगभग 10 करोड़ परिवार यानि करीब 50 करोड़ नागरिक इलाज की चिंता से मुक्त रहेंगे। सरकार ने 2018-19 के बजट में हेल्थ वेलनेस सेंटर बनाने के लिए 1200 करोड़ रुपये के फंड का भी प्रावधान किया। इसका मकसद है इलाज के साथ-साथ जांच की सुविधा भी मुहैया कराना। इतना ही नहीं इस पर भी काम चल रहा है कि जिला अस्पताल में मरीजों को जो दवाएं लिखी जाती हैं वे उन्हें अपने घर के पास के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में उपलब्ध हों।

2. जन सामान्य के लिए सस्ती दवाएं, सस्ते मेडिकल उपकरण – देश भर में आज करीब 3,000 जन औषधि केंद्रों पर सस्ते दामों पर दवाइयां उपलब्ध हैं। इसका क्या फायदा मिल रहा है इसे दो उदाहरण से समझा जा सकता है। डायबिटीज के रोगियों के लिए Glimepiride 2mg के 10 टैबलेट का पत्ता जो बाजार में 52.90 रुपये में मिलता है वह जन औषधि स्टोर्स पर मात्र 5.05 रुपये में मिलता है। Acarbose 50mg के 10 टैबलेट का पत्ता जो बाजार में 112.06 रुपये में मिलता है, वह जन औषधि स्टोर्स पर महज 55.90 रुपये में उपलब्ध है। सरकार ने जीवन रक्षक दवाओं सहित 1054 आवश्यक दवाओं को मूल्य नियंत्रण के दायरे में भी लाने का काम किया है। मई 2014 के बाद से इसके जरिए उपभोक्ताओं को अब तक 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का फायदा हुआ है। इसके साथ ही आज हार्ट स्टेंट लगवाना और घुटना प्रत्यारोपण पहले से कहीं अधिक सस्ता हो चुका है। हृदय रोगियों के लिए हार्ट स्टेंट की कीमत 85 प्रतिशत तक कम हो गई है तो Knee implants के दाम में 50 से 70 प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी है।

3. अभूतपूर्व रूप से बढ़ा देश में स्वच्छता का स्तर –  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता संभालने के बाद देश को स्वच्छ बनाने का बीड़ा उठा लिया। उनके द्वारा शुरू किया गया स्वच्छ भारत अभियान स्वच्छता को लेकर देश भर में अब तक की सबसे बड़ी मुहिम साबित हुई है। 2 अक्टूबर 2014 को लॉन्च हुई इस मुहिम के अंतर्गत पूरे देश को 2 अक्टूबर, 2019 तक खुले में शौच से मुक्त करना है और अब तक दो तिहाई से अधिक गांव इससे मुक्त हो चुके हैं। इस अभियान का असर ये है कि स्वच्छता की कवरेज 2014 के 38 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत को पार कर चुकी है। गौर करने वाली बात है कि कांग्रेस के करीब 6 दशक के शासन में 6.5 करोड़ शौचालय बने थे, जबकि मोदी सरकार के 4 साल में ही 7.25 करोड़ शौचालयों का निर्माण हो गया। प्रधानमंत्री मोदी की पहल से देश के सभी स्कूलों में शौचालयों का निर्माण हो चुका है।

4. योग के रूप में विश्व को दिया बेहतर स्वास्थ्य का मुफ्त साधन – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर विश्व जगत अब तक चार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को सफलतापूर्वक मना चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने पहले ही संबोधन में इस दिवस का प्रस्ताव रखा था जिसे अभूतपूर्व तरीके से समर्थन मिला। भारत सहित दुनिया भर में आज योग अपनाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, साथ ही योग में करियर और रोजगार के अवसर भी खूब बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री के संदेशों से दुनिया भर में लोगों पर प्रभाव पड़ा है और वे इसे अपनाकर बेहतर स्वास्थ्य में योग की भूमिका को महसूस कर रहे हैं। 

5. 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में कई प्रभावी कदम – किसानों को लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का अपना वादा मोदी सरकार ने पूरा कर दिया है। कुछ फसलों में तो यह लागत का दोगुना तक है। न्यूनतम समर्थन मूल्य का आधार किसानों की पूरी लागत को बनाया गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हो या प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, सॉयल हेल्थ कार्ड हो या फिर नेशनल बैम्बु मिशन, सरकार ने ऐसे कई कदम उठाए हैं जो किसानों की आय दोगुनी करने में सहायक होंगे। यूरिया की 100 प्रतिशत नीम कोटिंग किए जाने से खेती ने जहां नई रफ्तार पकड़ी, वहीं उसकी कालाबाजारी भी खत्म हो गई। ऑर्गेनिक खेती पर बल देने के साथ 2018-19 की बजटीय घोषणा के अनुरूप ऑपरेशन ग्रीन्स को शुरू किया जा रहा है जिसके अंतर्गत TOP (Tomato-Onion-Potato) योजना शुरू की गई है।  किसान भाई-बहनों को राष्ट्रीय कृषि मंडी (e-NAM) से कृषि उत्पादों की सही कीमत मिलने में सहायता मिल रही है।

6. रोजगार सृजन की दिशा में कई ठोस पहल – आंकड़े बताते हैं पिछले साल देश में एक करोड़ से ज्यादा लोगों को नौकरियां मिलीं, जिनमें से करीब 70 लाख औपचारिक क्षेत्रों की हैं। मोदी सरकार ने रोजगार के क्षेत्र में उन कदमों पर जोर दिया है जिनसे नौकरियां सृजित भी हों और युवा सिर्फ जॉब सीकर नहीं, बल्कि जॉब गिवर भी बनें। इसी का नतीजा है कि मुद्रा योजना और स्टार्टअप के जरिए भी रोजगार के ढेर सारे अवसर बने हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में मिलने वाले लोन की सहायता से आज जनसामान्य भी उद्यमी बन रहा है। योजना शुरू होने के तीन साल में 12 करोड़ से अधिक लोगों को लोन मुहैया कराए गए हैं। इनमें से 28 प्रतिशत ऐसे हैं जिन्होंने अपना कारोबार शुरू करने के लिए लोन लिया है। वहीं 28 राज्यों और 6 केंद्रशासित प्रदेशों के 419 जिलों में 9,750 स्टार्टअप रजिस्टर्ड हो चुके हैं। एक स्टार्टअप से औसतन 12 लोगों को नौकरियां मिलती हैं। वहीं स्किल इंडिया योजना के तहत अब तक करीब 2.5 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है।

7. महिला सशक्तिकरण की योजनाओं से मजबूत हुई नारीशक्ति – महिलाओं से संबंधित योजनाओं की विशेष बात ये है कि मोदी सरकार ने गर्भधारण से लेकर प्रसव, बच्चों का जन्म, बच्चियों की पढ़ाई, करियर यानी जीवन के हर पड़ाव को ध्यान में रखते हुए उन योजनाओं को केंद्रित किया है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में जहां देश भर में करीब 12,900 स्वास्थ्य केंद्रों पर हर महीने की नौ तारीख को गर्भावस्था से जुड़ी नि:शुल्क जांच का प्रावधान है, वहीं गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का स्वास्थ्य ठीक रहे, उन्हें पोषणयुक्त भोजन मिले इसके लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना शुरू की गई। इसके तहत माताओं को 6,000 रुपये देने की व्यवस्था है।  करीब 9,000 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान के साथ राष्ट्रीय पोषण मिशन को लॉन्च किया गया है। इसमें शिशुओं के साथ माताओं के पोषण को सुनिश्चित करने का लक्ष्य है। वहीं मेटरनिटी लीव को 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दिया गया है। इतना ही नहीं 50 से अधिक कर्मचारी वाले कार्यालयों में बच्चों के लिए क्रेच की सुविधा अनिवार्य की गई है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने मासूमों पर होने वाले जघन्य अपराध से जुड़े 2012 के POCSO एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences Act) में बदलाव कर बच्चियों से रेप के दोषियों के लिए फांसी तक की सजा का प्रावधान किया है। बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना के तहत देश में 1.26 करोड़ से अधिक बैंक खाते खुल चुके हैं। मुस्लिम समाज में तीन तलाक की कुप्रथा खत्म करने के लिए यह मोदी सरकार ही है जिसने पहली बार कोई ठोस कदम उठाया है। सरकार के प्रयासों से लोकसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक लोकसभा में पारित भी हो चुका है। 

8. सामाजिक न्याय को किया स्थापित –  उज्ज्वला और जन धन जैसी योजनाओं पर जिस प्रकार से अमल हुआ, वो सामाजिक न्याय को लेकर मौजूदा सरकार की प्रतिबद्धता को जता जाता है। जन धन दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन योजना है जो समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने के अपने उद्देश्य में सफल रही है। केंद्र में मोदी सरकार के आने से पहले भारत में बैंक खाते रखने वाले लोगों की संख्‍या करीब 52 प्रतिशत थी जो अब 80 प्रतिशत को पार कर चुकी है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले करीब चार करोड़ परिवारों को फ्री एलपीजी कनेक्शन मुहैया कराए जा चुके हैं। इनमें से 45 प्रतिशत लाभार्थी दलित और आदिवासी परिवार से हैं। उज्ज्वला में पांच करोड़ के शुरुआती लक्ष्य को बढ़ाकर आठ करोड़ किया गया है जिसे वर्ष 2020 तक पूरा करना है। यह योजना खाना पकाते समय निकलने वाले जानलेवा धुएं से आजादी देकर देश की नारी शक्ति के लिए बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित कर रही है। मोदी सरकार दलितों को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए किस प्रकार समर्पित है इसका सीधा उदाहरण बीते हफ्ते तब दिखा जब एससी-एसटी संशोधन बिल को लोकसभा और राज्यसभा से पास कराया गया। वहीं काफी समय से लंबित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का रास्ता भी साफ हो चुका है।

9. देश के हर गांव तक पहुंचाई बिजली – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के किए वादे के मुताबिक देश के एक-एक गांव तक बिजली पहुंचा दी गई। 25 जुलाई 2015 को शुरू की गई दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अंतर्गत देश के उन सभी 5,97,464  गांवों में 1000 दिन के अंदर बिजली पहुंचाना था जिसे 13 दिन पहले ही पूरा कर लिया गया। अभी सहज बिजली हर घर योजना ‘सौभाग्य’ को आगे बढ़ाया जा रहा है जिसके तहत 4 करोड़ घरों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिया जा रहा है। इतना ही नहीं सरकार LED बल्ब लगाने की अपनी योजना UJALA से 38,743 mn kWh बिजली बचा भी रही है जिससे 15,497 करोड़ रुपये की वार्षिक बचत हो रही है।

10. ऊर्जा उत्पादन में बढ़ी सोलर एनर्जी की हिस्सेदारी – जिस सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने से कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारें हमेशा बचती रहीं उसी सोलर एनर्जी के क्षेत्र में मोदी सरकार ने कई उपलब्धियां दर्ज कर दिखाई हैं। देश के कुल ऊर्जा उत्पादन में आज सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ रही है, जिससे परंपरागत ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होने लगी है। राष्‍ट्रीय सौर मिशन के तहत सौर ऊर्जा क्षमता स्‍थापित करने के लक्ष्‍य को 20 गीगावाट से बढ़ाकर वर्ष 2021-22 तक 100 गीगावाट कर दिया गया है। सोलर एनर्जी पर जोर का नतीजा है कि पवन ऊर्जा क्षमता-स्थापना में भारत दुनिया में चौथे नंबर पर है। सोलर एनर्जी को लेकर भारत की एक बड़ी पहल तब सामने आई जब प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर 121 देशों के साथ इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) का गठन हुआ। मार्च 2018 में नई दिल्ली में ISA का पहला समिट भी हुआ।

11. इन्फ्रास्ट्रक्चर का अभूतपूर्व विकास – मोदी सरकार ने देश को सबसे लंबी सड़क सुरंग और पुल को समर्पित करने का काम किया है। पिछले वर्ष सड़क पर देश की सबसे लंबी सुरंग चेनानी-नाशरी सुरंग राष्ट्र को समर्पित किया गया। वहीं असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने देश के सबसे लंबे पुल को भी जनता को समर्पित किया गया। 9.15 किलोमीटर लंबे ढोला-सादिया पुल (भूपेन हजारिका पुल) ने ऊपरी असम और अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी हिस्से के बीच 24 घंटे की कनेक्टिविटी को सुनिश्चित किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सरकार ने 2022 तक हर किसी के पास ‘अपना घर’ का लक्ष्य रखा गया है और ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इस योजना के तहत डेढ़ करोड़ से अधिक मकान बनवाए जा चुके हैं। स्मार्ट सिटी मिशन में कॉम्पीटिशन के जरिए 99 शहरों को चिन्हित किया जा चुका है। इस प्रोजेक्ट से करीब 9.9 करोड़ लोगों के जीवन में बदलाव आएगा और इसके लिए 2,01,979 करोड़ रुपये का बजट तय रखा गया है। वहीं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की रफ्तार का पता इसी से चलता है कि 2014 में ग्रामीण क्षेत्रों में रोड कनेक्टिविटी 56 प्रतिशत थी, आज वो बढ़कर 82 प्रतिशत तक जा पहुंची है। 2013-14 में हाईवे का निर्माण जहां 12 किलोमीटर प्रतिदिन था वो 2014 से 2018 के बीच बढ़कर 227 किलोमीटर प्रतिदिन हो गया।

12. भ्रष्टाचारमुक्त राजकाज और कामकाज की ओर बढ़ा देश – नोटबंदी और जीएसटी, मोदी सरकार के इन दो अभूतपूर्व फैसलों के साथ देश में भ्रष्टाचार मुक्त प्रणाली की मजबूत नींव पड़ी। नोटबंदी के बाद लोगों में टैक्स देने की तत्परता बढ़ी। पहले गैर-वेतनधारी लोगों में केवल 74 लाख ही आयकर देते थे, लेकिन अब ऐसे आयकर दाताओं की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। नोटबंदी के साथ देश में करीब तीन लाख फर्जी कंपनियां बेनकाब हो गईं जिन्हें सरकार ने खत्म कर दिया। नोटबंदी के कदम ने लेन-देन में डिजिटल प्रणाली अपनाने में जबरदस्ती तेजी आई। वहीं जीएसटी के साथ मौजूदा सरकार ने अप्रत्यक्ष करों के जंजाल को समेटकर एक राष्ट्र एक कर का सपना साकार कर दिखाया। व्यापारियों का अनुभव भी कहता है कि जीएसटी ने कारोबार में पारदर्शिता लाने का काम किया है। वहीं सरकारी स्कीम के तहत मिलने वाले पैसे सीधे अब लाभार्थियों के खाते में पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं डीबीटी आधारित सिस्टम से सरकार ने हजारों करोड़ रुपये बचाए भी हैं। 

13. भारत को बनाया दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आर्थिक नीतियों का असर ये रहा है कि भारत फ्रांस को पीछे धकेलकर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में शुमार हो चुका है। आर्थिक क्षेत्र के कई सुधारों के नतीजों के साथ सरकार देश के लिए इस उपलब्धि को पाने में सफल रही है और अब उसका ध्यान छठे से पांचवें नंबर पर है। देश में कारोबार करना भी पहले से बेहद आसान हो चुका है। विश्व बैंक की Ease of Doing Business की रैंकिंग में भारत का 142वें नंबर से छलांग लगाकर 100वें नंबर पर आना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।  निवेशक अनुकूल माहौल से FDI में तेजी आई है। वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान 61.96 अरब अमेरिकी डॉलर का कुल एफडीआई प्राप्त हुआ। यह एक सर्वकालिक रिकॉर्ड है। गौर करने वाली बात है कि मोदी सरकार ने एफडीआई नीति में कई संशोधन किए। एफडीआई नीति को उदार बनाना इज ऑफ डूइंग बिजनेस का ही एक हिस्सा रहा है।  

14. आतंक पर चौतरफा चोट – मौजूदा सरकार ने आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पर जमीनी अमल करके दिखाया है। इसका नतीजा ये है कि भारत में आतंकवाद अब अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है। पिछले चार वर्षों में जम्मू-कश्मीर, पंजाब और पूर्वोत्तर के बाहर आतंकवादी हमलों में चार नागरिकों की मौत हुई। यूपीए शासन के दौर में यह संख्या सालाना 80 हुआ करती थी। जम्मू कश्मीर में ऑपरेशन ऑल आउट से आतंक का तेजी में खात्मा हो रहा है। पिछले चार वर्षों में राज्य में 600 से अधिक आतंकी मौत के घाट उतारे जा चुके हैं। इनमें से कई आतंकी संगठनों के सरगना भी हैं।

15. विदेश नीति में भरी नई शक्ति – मोदी सरकार ने अपनी विदेश नीति में दोस्ती का हाथ बढ़ाया है तो यह आतंक के सरपरस्त बनने पर पाकिस्तान को विश्व मंच पर अलग-थलग करने में भी सफल रही है। देश में पहली बार  मोदी सरकार ने ही सर्जिकल स्ट्राइक करने का दम दिखाया। देश के जांबाज सैनिकों ने 28-29 सितंबर, 2016 की देर रात पीओके में आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करते हुए कई आतंकियों को मार गिराया। वहीं पिछले साल डोकलाम पर लंबे गतिरोध के मामले में भारत चीन के सामने किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आया। चीनी सैनिकों को लौटने को मजबूर होना पड़ा था। डोकलाम पर अपने स्टैंड से मौजूदा सरकार यह संदेश देने में सफल रही कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अब भारत वैसा देश नहीं जैसा 1962 में था।  यह 21वीं सदी का एक ताकतवर भारत है जिसके पास अब वैश्विक नेतृत्व की शक्ति है।  

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