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केरल में बीजेपी-आरएसएस कार्यकर्ता होना गुनाह है?

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भगवान का देश (God’s Own Country) कहे जाने वाले केरल में लगता है शैतान का राज हो गया है। यहां बीजेपी और आरएसएस कार्यकर्ता होना गुनाह है। बीजेपी-आरएसएस के कार्यकर्ता को केरल में जीने का अधिकार नहीं है, उन्हें अपना मत चुनने का भी अधिकार नहीं है। तभी तो आए दिन “शांति प्रिय पार्टी” सीपीएम के कार्यकर्ता घर में घुस-घुसकर बीजेपी कार्यकर्ता की बेहरमी से हत्या पर हत्या कर रहे हैं। राजनैतिक विरोधियों से निपटने का एकमात्र उपाय “हत्या करना” की खोज करने वाले पी विजयन को सीपीएम ने प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया है।

तभी मुख्यमंत्री के गृह जनपद में कन्नूर में बुधवार रात 18 जनवरी, 2016 भी घर में घुसकर बीजेपी कार्यकर्ता की चाकू गोदकर हत्या कर दी गई। 12 दिन पहले 6 जनवरी, 2016 को बीजेपी कार्यकर्ता के गोद से दस माह के बच्चे को छीनकर सड़क पर पटक दिया गया। हिन्दु धर्म विरोधी घटनाओं को अंजाम देने वालों को संरक्षण देने वाला गैंग, गिद्धों की झुंड के रूप में सड़कों पर दिखाई देने वाला अवार्ड वापसी समूह और असिहष्णुता की राजनीति करने वाले सारे के सारे किस बिल में दुबके हुए हैं। उनसे कुछ प्रश्नों के जवाब चाहिए –

  • क्या सीपीएम कार्यकर्ताओं द्वारा राजनैतिक विरोधियों की जघन्य हत्या करना असहिष्णुता की श्रेणी में नहीं आता? 
  • क्या बीजेपी और आरएसएस कार्यकर्ता होना गुनाह है?
  • आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराने पर मानवाधिकार की बात करने वाले चुप क्यों हैं?
  • क्यों सीपीएम जैसी हिंसक पार्टियों पर आजीवन राजनैतिक प्रतिबंध लगा देना चाहिए?

कहते हैं कि शिक्षा, व्यक्ति को इंसानियत से जीना सीखाती है, विनम्रता सीखाती है। लेकिन देश के सबसे शिक्षित प्रदेश केरल में ये हो क्या रहा है? आखिर यह कैसा राजनीतिक विरोध है, जहां उस बच्चे तक को बख्शा नहीं जा रहा है, जिसे मालूम ही नहीं, दुनिया क्या है? सियासी रंजिश में इतनी नफरत क्यों?

फाइल फोटो

केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन भी हत्यारोपी 

केरल के वर्तमान मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन राजनैतिक विरोधियों से निपटने के लिए हत्या ही एकमात्र उपाय के अविष्कारक हैं। उन पर केरल में पहली राजनीतिक हत्या का आरोप है। आरएसएस कार्यकर्ता वडिकल रामकृष्णन की हत्या 28 अप्रैल 1969 को हुई थी। यह केरल राज्य में आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या की पहली घटना है। तब से लेकर अब तक 172 आरएसएस-भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या का केस पुलिस की फाइलों में दर्ज है। एक आंकड़े के मुताबिक हर पांच में से चार घटनाओं के लिए सीपीएम कार्यकर्ता कसूरवार है।

कन्नूर जिले में सिर्फ पांच महीने में 300 से अधिक राजनीतिक हिंसा की घटनाएं हुईं।कन्नूर जिला केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन का गृह जनपद है। पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, 1 मई, 2016 से 16 सितंबर के बीच केवल कन्नूर जिले में राजनीतिक हिंसा की कुल 301 वारदातें घटित हुईं। दर्ज रिपोर्ट होने के बाद सर्वाधिक 485 सीपीएम से जुड़े नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। ये वो आंकड़ा है, जो रिकॉर्ड में है।

2012 से अब तक की प्रमुख राजनीतिक हत्याएं 

संतोष (कन्नूर) – 18 जनवरी, 2017 की रात घर में अकेला पाकर सीपीएम के गुंडों ने चाकूओं से गोदकर संतोष की हत्या कर दी। पुलिस को जानकारी मिलने पर अस्पताल ले जाया गया लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले संतोष की मौत हो गई।

सी. राधाकृष्णन (पलक्कड़) – 28 दिसंबर, 2016 को सीपीएम कार्यकर्ताओं ने कोझिकोड के पलक्कड़ में 44 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता सी. राधाकृष्णन को उनके ही घर में जिंदा जलाने की कोशिश हुई। उनके घर के सामने खड़ी उनकी बाइक में पहले आग लगाई। फिर घर में गैस का छिड़काव करके घर में आग लगा दी। इस आगजनी में सी राधाकृष्णन सहित दो परिजन और बुरी तरह से झुलस गए। त्रिस्सुर जुबली मिशन हॉस्पिटल में 6 जनवरी, 2017 को उपचार के दौरान सी. राधाकृष्णन की मौत हो गई।

मुख्यमंत्री के पैतृक गांव में बीजेपी वर्कर रेमिथ की हत्या

रेमिथ (कन्नूर) : अक्टूबर, 2016 में ही 26 साल के रेमिथ नामक युवक की हत्या कर दी गई। चौदह साल पहले उसके पिता को भी मार दिया गया था। ये दोनों बीजेपी-आरएसएस से जुड़े थे। ये हत्याएं पिनाराई गांव में हुई जो कि केरल के मुख्यमंत्री का गांव है।

कथिरूर मनोज (कन्नूर) : तीन सितंबर, 2014 को कथित तौर पर सीपीएम कार्यकर्ताओं के हमले में आरएसएस कार्यकर्ता मनोज की मौत हो गई। इस मामले में वरिष्ठ सीपीएम नेता पी जयराजन को भी पुलिस हिरासत ने हिरासत में लिया था।

केके रंजन (कन्नूर) : सीपीएम कार्यकर्ताओं की ओर से की गई पत्थरबाजी में केके रंजन के सिर पर गहरी चोट लगी और एक दिसंबर को उनकी मौत हो गई।

विनोद कुमार (कन्नूर) : एक दिसंबर, 2013 को आरएसएस कार्यकर्ता विनोद कुमार की हत्या मार्च निकालने के दौरान सीपीएम कार्यकर्ताओं ने की।

साजिन मोहम्मद (तिरुअनंतपुरम) : 30 अगस्त, 2013 को एक कॉलेज में एसएफआई और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प के दौरान बम हमले में मारे गए।

सुजीत (कन्नूर) : 19 फ़रवरी 2016 को आरएसएस कार्यकर्ता सुजीत की उनके परिवार के सामने ही कथित सीपीएम कार्यकर्ताओं ने गला काटकर हत्या कर दी।

नेडुमकंडम अनीश रंजन (इडुक्की) : 18 मार्च, 2012 को एसएफआई के 23 साल के नेडुमकंडम अनीश रंजन की हत्या दो सीपीएम कार्यकर्ताओं ने चाकू मारकर की थी।

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